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Wednesday, July 7, 2010

बस में यात्रीयों की कुछ खास आदतें

सुबह उठने अगर आपको ५ मिनट भी लेट होता है तो आपकी पूरी दिनचर्या डांवाडोल हो जाती है ।  फिर एक के बाद एक आप लेट ही होते जाते है । जब तक की आप किसी एक महत्वपूर्ण काम को छोड ना दे । पर उसको छोडना भी एक साहस वाला काम है । की किसी महत्वपूर्ण काम को ना किया जाये । क्या आप मुह साफ़ नहीं करेंगे, नित्य कर्म से नहीं निपटेंगे , क्या आप ठीक तरह से नहीं नहा कर कंकड स्नानं करने पर जोर देंगे । नहीं ना मेरे साथ ऐसा अक्सर होता है । मैं जरा सुबह उठने में आलसी हूँ । ऐसा नहीं है की में उठता नहीं हूँ में रोज सुबह ब्रह्म मुहर्त में उठता हूँ । और फिट समय देख कर सो जाता हूँ । जिसका जी परिणाम होता है की पिछले १ सप्ताह से में अपने समय वाली बस नहीं पकड़ पाया । उसके पीछे वाली बस में आता हूँ पर पीछे वाली बस रास्ता साफ़ होने के बावजूद आगे वाली बस से कभी आगे नहीं होती बल्कि मेरी तरह आराम से चलती है । और बस में एक चीज़ साफ़ साफ़ शब्दों में लिखी है की आप लेट हैं हम नहीं । अरे इतना साफ़ और बड़ा बड़ा तो उनकी टिकेट पर रुपये भी छापते जितना बड़ा उन्होंने ये उपदेश लिख रखा है । में अपनी नियमित बस की सवारिओं को बड़ा मिस करता हूँ । उसका कारण भी है उस बस में मुझे पता है की अब सीट खाली होने वाली है तो पहले से सेटिंग बन जाती है । मगर मेरे इस बस अगर आपको पता भी है की फलां सीट खली होने वली है तो उसके हिलने से पहले कई लोग हिल हिल के वंह पहुच जाते है । कोई गलती से पुच ले की भाई साहब फलां जगह आये तो बताना । तो सामने वाला उस स्टैंड से २-३ स्टैंड पहले से सीट पर बैठने के लिए कह सेट है की आगे वाला स्टॉप आपका है उतर जाइये । और खुद बैठ बैठ जाता है । और वो भीड़ में बड़ी मुश्किल से गेट पर पहुचता है तो पता चलता है की अभी थोडा टाइम है । पर वो भीड़ का हिस्सा बन जाता है और जिससे सीट मिल गयी वो सीट का । मैंने तो एक बार ऐसा भी होते देखा की एक जनाब यही सोचते हुए १ जनाब को २ स्टैंड पहले उठवा दिया पर उनकी बोये बीज का फल एक जनाब खा गए और उनके बैठने से पहले वो बड़ी शान से बैठ गए और उस आदमी से बोले की भाई साहब आप खड़े रहे आपका स्टैंड अभी दूर है । स्टैंड पर उतना वाला व्यक्ति अपनी खिसियाहट उतार नहीं पाया और गेट पर खड़ा हो अपनी यात्रा को पूरी करता रहा । सीट का मोह इतना बड़ा है की कई महिलओं की सीट बड़ी फक्र से बैठे रहते है । और केवल खूबसूरत महिला या लड़की को देख कर उठते है और तो और कभी वो भी नहीं । जब कोई कह देता है है तो बहस करते है और नियम कायदे कानून की बात करते । और अगर कोई महिला सीट पर किसी तरह बैठ जाये तो कोशिश करते है की सीट पर उनका कोई ना कोई हिस्सा छूता रहे । पता नहीं ये किस तरह का कुर्सी का मोह है या स्त्री का मोह है । पर जो भी बड़ा ही हीन है । कुछ पुरुष सिर्फ महिला सीट पर बैठना ही पसंद करते है चाहे बाकी की सीट खाली क्यों ना हो । पता नहीं उस सीट पर बैठ कर किस तरह के सुकून की प्राप्ति होती है ये मेरे लिए बड़ी ही जिज्ञासा का प्रश्न है । और कुछ महिला सीट पर बैठ कर बड़ी बेसब्री के साथ किसी सुंदर महिला के आने का इंतज़ार करते है और बड़ी प्रसनत्ता के साथ उनको सीट देते है और फिर किसी और सीट के जुगाड में लग जाये है या उसी महिला या लड़की के पास खड़े होने का सुख प्राप्त करते है । और अगर कंही कोई बुजुर्ग महिला आ जाये तो उनका चेहरा देखने कायक होता है । 

3 comments:

  1. "कुछ पुरुष सिर्फ महिला सीट पर बैठना ही पसंद करते है चाहे बाकी की सीट खाली क्यों ना हो" भले यह सही भी हो तो हम कहेंगे की आपकी मानसिकता सही नहीं है. भटक रही है.

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  2. achchi tarah se aapne apne din charya ka ek ank likh diya hai..

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  3. wish u all the best.achi kavita hai.....

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