ads

Translate

Tuesday, September 11, 2012

बरसात की बूँद


गालों पर तेरे बरसात का पानी,
हवाओं से कांपते होंठ गुलाबी.
नशीली आँखों का रंग आसमानी,
नाक पर गुस्सा है बेमानी.

सिकुड कर तेरा बैठना,
जैसे फूल की हो खिलने की तैयारी.
हवा के झोके ने भी ठानी,
तेरे जुल्फों से करनी थी जैसे उसे मनमानी.

बार-बार तेरे गैसुहों का लहराना कर आँखों पर आना,
तेरा प्यार से उनको संवारना.
झोंको के साथ तेरी खुशबू का आना,
हर साँस पर धड़कन का रुक सा जाना.
@csahab 

1 comment: