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Wednesday, July 21, 2010

बस में वियाग्रा गुरु का व्याख्यान, सफर में हुआ आराम

बात को २-३ दिन बीत चुके हैं । मुझे नहीं पता ये २-३ दिन मेरे किस तरह बीते हैं ।  समोसे वाली घटना के बाद में बड़े ही संभल कर बस में सीट चुनता हूँ । वक्त शाम का था ऑफिस से जाते हुए मैंने उस दिन समोसे के बजाय भुट्टे को प्राथमिकता दि । दिल्ली के भुट्टों में वो मज़ा नहीं है जो कानपूर के भुट्टों में में । वो कहते हैं ना दुधिया भुट्टा मैंने दिल्ली में बिकता नहीं देखा । दुधिया भुट्टे की बात ही निराली है क्या मुलायम दाने, नमक से साथ मुह में पानी की तरह घुलते है । बस में भुट्टों की महक ,में खो सा गया था । उसके बाद बस खाली मिली तो रहत भी मिली । मैं एक सीट पर चिपक कर बैठ गया । २-३ स्टॉप के बाद बस में थोड़ी भीढ़ हो गयी । जिससे लोगों की तादाद बढ़ गयी और वो पास पास आते चले गए । मेरे पास जो बस में खली जगह होती है वहाँ पर २ सज्जन से दिखने वाले व्यक्ति आ कर खड़े हो गए । दिखने में तो वो बड़े ही सज्जन पुरुष प्रतीत हो रहे थे पर ५ मिनट बाद प्रतीत से प्र हट गया और उनके तीत बहार आने लगे । उनमे से एक व्यक्ति तो बाबा वियाग्रा दास निकले । उनके पास हर मर्ज़ की दवा थी । जो अपने कई बार दीवारों पर देखा होगा पर कोई देख ना ले एस डर से जायदा नहीं देखा होगा या तेज़ी से पढ़ लिया होगा । उनके साथ वाला चाहे किसी भी बात पर बात करे बाबा उसमे एक शक्ति वर्धक दवाई जोड़ देते थे । और उनका निशाना बिलकुल सही जाता था । उनके पीछे उनके ही तर्क थे जिससे उनका सामने वाला पूरी तरह से संतुष्ठ हो जाता था । पता नहीं या तो वो पूरी तरह से नादान था या तो बाबा की भक्ति में लीन भक्त । वो उससे उस शक्ति वार्धर दवा के कई सच्ची कहानियाँ एक के बाद एक कर के सुना रहे थे और उनका बहकत बीच बीच में अपनी जिज्ञासा भी शांत कर रहा था की गुरु जी ऐसा क्यों होता है इसका कारण क्या है । और बाबा बड़े ही तन्मंता से उसकी बात का जवाब देते थे । उनकी बातों से मुझे लगा की बाबा का एक एक खानदान वासी उस शक्तिवर्धक दवा का ही परिणाम है । क्योंकि उनके अनुसार छोटा हो या बड़ा, साडू का बेटा हो या भाई का , या फिर बहिन का  सब बाबा की दि हुई चमत्कारी दवाई के बल पर आज अपना नाम रोशन कर रहे हैं । वर्ना उनकी क्या मजाल की वो किसी लायक थे । पर बाबा में उनकी इस समस्या को तुरंत जाना और हल बाता कर उसका वैवाहिक जीवन तबाह होने से बचा लिया । और तो और उनका साफ़ कहना था की पुरुष अगर बिना उस दवाई के कुछ नहीं है । अर्थात शून्य है । इसके बाद तो उनका भक्त कुछ डर सा गया । मेरे हिसाब से उसकी उम्र कोई ३५-३६ के पास के आस पास होगी और बाबा भी लग्बह्ग इसी के करीब होगा ।पर बाबा था बड़ा जी जमा हुआ खिलाडी । सारी बातों का इस तरह से वैवाहिक जीवन से जोड़ कर उस व्यक्ति के दिलो-दिमाग पर छा जाने को बेताब था और उसके भक्त की बातों से लगा की वो बाबा सफल हो गया था । उन दोनों ने रास्ते भर कुछ एस तरह की बातें की और सवाल किये की मैं लिख नहीं सकता पर समझ जरूर गए होंगे । मेरा ये सोचना है ऐसे ही कम और नासमझ लोंगो का फायदा झोलाछाप डॉक्टर उठाते है और ना जाने क्या से क्या कर देते है व कई बार तो घर की इज्ज़त जाती है और कई इज्जत , लाज , मान मर्यादा और तो और अपने प्रिय की जान तक से हाथ धोना  पड़ता है । कृप्या ऐसा कुछ ना करे ,,,,,,,,,,,,,,