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Friday, July 16, 2010

बस में २ तरफ़ा हमला और मैं बेचारा अकेला

कल मुझे एक जरूरी काम से कंही जाना था पर ऑफिस में थोड़े काम की वजह से में वो काम नहीं कर पाया । खैर उसका कोई मलाल नहीं । मैं भी रोज की तरह मस्ती में ऑफिस से घर की तरफ गुनगुनाते हुए निकला । इस बात से अनजान की आज बस में आज मेरे पर हमला होने वाला है । रास्ते में अचानक मेरी संवेदी तंत्रिकाओं ने कुछ जानी पहचानी खुशबू को महसूस किया । वो खुशबू गरमागरम समोसे की थी । ये मेरी कुछ कमजोरीयों में से एक है अगर मेरे पास जेब में रूपये पर्याप्त मात्र में हैं यअ थोड़े कम भी हैं तो में समोसे खा कर बाकि चीजों से समझोता कर सकता हूँ पर गरम समोसों से नहीं । मैंने तुरंत खुशबू की दिशा में कदम बढ़ा दिए । और समोसो को खा कर हो दम लिया । वो पुदीने वाले समोसे और पुदीने वाली चटनी के साथ लगता था अगर दिल्ली में कंही स्वर्ग है तो यंही है यंही है और यंही है । वैसे भी मैंने दिल्ली में इतने अच्छे और सस्ते (दिल्ली के हिसाब से ) समोसे शायद पहली बार खा रहा था । समोसे खाने की मेरी अपनी ही अदा है । अगर दुकान में जगह है तो में गरम समोसे वंही खाना पसंद करता हूँ वर्ना चलते चलते खाना में पसंद करता हूँ । एक बार समोसे एक बार चटनी , फिर समोसा फिर चटनी , बस यही क्रम चलता है । और बीच बीच में गरम आलू से जीभ का जलना भी बड़ा अच्छा लगता है पर संतोष नहीं होता की समोसे को ठंडा होने दू तब खाऊ । इन समोसे के चक्कर में कब बस स्टैंड पर पहुंचा पता ही नहीं चला । फिर भी मेरे समोसे मेरे हाथ की शोभा बढ़ा रहे थे । कुछ लोग के मुह में पानी और कुछ के जलन हो रही थी मेरे इस तरह खाने की अदायगी से । पर में भी मानने वाला कहाँ था चाहे समोसा कितना भी गरम क्यों ना हो । फिर जब बस आई तो जल्दी से उपर चढ़ना भी नहीं भुला सीट जो हथियानी थी । यहीं से मेरे रात की पीड़ा शुरू हुई । मैंने सीट तो हथिया ली पर जल्दी जल्दी में ये नहीं देखा की पिच कौन बैठा था । इसका एहसास मुझे बैठे और लगभग सभी अच्छी सीटों के भर जाने के बाद हुआ । मेरे पीछे जो जनाब बैठे थे वो शायद साउथ के कोई जनाब थे । और किसी महिला मित्र से अपनी भाषा में बतिया रहे थे । और ना जाने वो किस भाषा का प्रयाग कर रहे  थे मुझे कभी वो तेलगु लगती कभी उड़िया तो कभी कुछ और । बस बीच बीच में कुछ संस्कृत के शब्द समझ में आ जाते और कभी कुछ इग्लिश के । मैं उन्ही शब्दों को सुन कर संतोष करने की कोशिश कर रहा था । ये सारे स्वर में दाहिने कानो से सुनाई दे रहे थे । और मेरे बाये काम में एक बहुत की प्रेमिका को समर्पित प्रेमी के शब्द उस अन्य राज्य वाले शब्दो के साथ में मस्तिष्क में मंथन कर रहे थे । वो अपनी प्रेमिका से बड़े ही अजीब तरीके से बात कर रहा था । वो कभी उससे प्यार से बात करता कभी गुस्से से उसका कुछ पता नहीं था की कब क्या कह दे । पर मेरे मस्तिष्क में एक अजीब से पीड़ा हो रही थी ना मुझे चैन था ना मुझे नींद । मुझे दोनों पर दया आ रही थी की देखो बेचारे कितने लगन भाव से सरकार को सेवा कर देने में लगे है और एक मैं हू की चुपचाप इनकी बात सुन रहा हूँ । उन दोनों की बात मेरे स्टॉप पर आने  तक खतम नहीं हुई थी । में उनकी बात से कुछ इस क़द्र बेझिल हो गया था की मैंने एक स्टॉप पहले उतरने का निर्णय ले लिया । और अपनी सीट किसी और को देने का प्रयास किया वो मेरे पास वाले मुझसे ज्यादा चालाक निकले शायद वो उसको पहले से जानते थे और मेरी सीट खाली की खाली ही रही । 

Monday, July 12, 2010

जम के बरसो आज ........

जम कर बरसो आज
धो दो सारी पानी वाली आग
लोग हो जाये तुमसे निहाल
और फिर कहे तुम क्यों आये आज

तुम तब भी ना रुकना
तुम अपने वेग तो मत थमने देना
रफ़्तार और बढा देना
बुँदे और बड़ी कर देना

फिर लोग कहेंगे
आज तुम क्यों बरसे , इतना विशाल
तुम फिर भी मत सुनना इनकी
ये तो लोग है ये सिर्फ कहते है

तुम कम बरसो तो ये कहेंगे
ना बरसो तो ये कहेंगे
कम बरसो तो ये कहेंगे
मंद बरसो तो ये कहेंगे

तुम करो वही जो तुम्हे लगे सही
जितना मर्ज़ी हो उतना बरसो
दिखा तो रास्तो को रास्ता
जम के बरसो आज

Wednesday, July 7, 2010

बस में यात्रीयों की कुछ खास आदतें

सुबह उठने अगर आपको ५ मिनट भी लेट होता है तो आपकी पूरी दिनचर्या डांवाडोल हो जाती है ।  फिर एक के बाद एक आप लेट ही होते जाते है । जब तक की आप किसी एक महत्वपूर्ण काम को छोड ना दे । पर उसको छोडना भी एक साहस वाला काम है । की किसी महत्वपूर्ण काम को ना किया जाये । क्या आप मुह साफ़ नहीं करेंगे, नित्य कर्म से नहीं निपटेंगे , क्या आप ठीक तरह से नहीं नहा कर कंकड स्नानं करने पर जोर देंगे । नहीं ना मेरे साथ ऐसा अक्सर होता है । मैं जरा सुबह उठने में आलसी हूँ । ऐसा नहीं है की में उठता नहीं हूँ में रोज सुबह ब्रह्म मुहर्त में उठता हूँ । और फिट समय देख कर सो जाता हूँ । जिसका जी परिणाम होता है की पिछले १ सप्ताह से में अपने समय वाली बस नहीं पकड़ पाया । उसके पीछे वाली बस में आता हूँ पर पीछे वाली बस रास्ता साफ़ होने के बावजूद आगे वाली बस से कभी आगे नहीं होती बल्कि मेरी तरह आराम से चलती है । और बस में एक चीज़ साफ़ साफ़ शब्दों में लिखी है की आप लेट हैं हम नहीं । अरे इतना साफ़ और बड़ा बड़ा तो उनकी टिकेट पर रुपये भी छापते जितना बड़ा उन्होंने ये उपदेश लिख रखा है । में अपनी नियमित बस की सवारिओं को बड़ा मिस करता हूँ । उसका कारण भी है उस बस में मुझे पता है की अब सीट खाली होने वाली है तो पहले से सेटिंग बन जाती है । मगर मेरे इस बस अगर आपको पता भी है की फलां सीट खली होने वली है तो उसके हिलने से पहले कई लोग हिल हिल के वंह पहुच जाते है । कोई गलती से पुच ले की भाई साहब फलां जगह आये तो बताना । तो सामने वाला उस स्टैंड से २-३ स्टैंड पहले से सीट पर बैठने के लिए कह सेट है की आगे वाला स्टॉप आपका है उतर जाइये । और खुद बैठ बैठ जाता है । और वो भीड़ में बड़ी मुश्किल से गेट पर पहुचता है तो पता चलता है की अभी थोडा टाइम है । पर वो भीड़ का हिस्सा बन जाता है और जिससे सीट मिल गयी वो सीट का । मैंने तो एक बार ऐसा भी होते देखा की एक जनाब यही सोचते हुए १ जनाब को २ स्टैंड पहले उठवा दिया पर उनकी बोये बीज का फल एक जनाब खा गए और उनके बैठने से पहले वो बड़ी शान से बैठ गए और उस आदमी से बोले की भाई साहब आप खड़े रहे आपका स्टैंड अभी दूर है । स्टैंड पर उतना वाला व्यक्ति अपनी खिसियाहट उतार नहीं पाया और गेट पर खड़ा हो अपनी यात्रा को पूरी करता रहा । सीट का मोह इतना बड़ा है की कई महिलओं की सीट बड़ी फक्र से बैठे रहते है । और केवल खूबसूरत महिला या लड़की को देख कर उठते है और तो और कभी वो भी नहीं । जब कोई कह देता है है तो बहस करते है और नियम कायदे कानून की बात करते । और अगर कोई महिला सीट पर किसी तरह बैठ जाये तो कोशिश करते है की सीट पर उनका कोई ना कोई हिस्सा छूता रहे । पता नहीं ये किस तरह का कुर्सी का मोह है या स्त्री का मोह है । पर जो भी बड़ा ही हीन है । कुछ पुरुष सिर्फ महिला सीट पर बैठना ही पसंद करते है चाहे बाकी की सीट खाली क्यों ना हो । पता नहीं उस सीट पर बैठ कर किस तरह के सुकून की प्राप्ति होती है ये मेरे लिए बड़ी ही जिज्ञासा का प्रश्न है । और कुछ महिला सीट पर बैठ कर बड़ी बेसब्री के साथ किसी सुंदर महिला के आने का इंतज़ार करते है और बड़ी प्रसनत्ता के साथ उनको सीट देते है और फिर किसी और सीट के जुगाड में लग जाये है या उसी महिला या लड़की के पास खड़े होने का सुख प्राप्त करते है । और अगर कंही कोई बुजुर्ग महिला आ जाये तो उनका चेहरा देखने कायक होता है ।