ads

Translate

Wednesday, December 8, 2010

तेरे अक्स कि तलाश में

तेरी खुशबू का अहसास
कर देता है मदहोश
तुझे महसूस करता हूँ फ़िज़ाओं में
हवाओं में, साँस लेते अहसासों में
जब तुझे उकेरता हूँ
कागज पर
क्यों नज़र नहीं आता
तेरा वो हसीन चेहरा
वो चमकती आंखे
वो जुल्फों का साया
वो गालों पर गहरा समंदर
वो मासूम मुस्कान
वो सुबह की पहली अंगड़ाई
जैसे पंक्षी उड़े आकाश में
सपनों को सोच कर मुस्कुराना
फिर उलझी जुल्फों को सुलझाना
नहीं खींच पाता
मैं तेरा अक्स कागजों पर
रंगीन कलमों से
देखा था तुझे रात में
बरसात के बाद में
तस्वीर कुछ धुंधली थी
अँधेरी रात में लिपटी थी
हवा के साथ उड़ता था आंचल
चेहरा था धुंध में श्यामल
सोचा कि तुझे बाँहों में भर कर देख लू
तुझे छू कर महसूस कर लू
पर तू हो गई आँखों से ओझल
आज भी उसी स्वप्न कि आस में सोता हूँ
हर वक्त तेरी सोच में होता हूँ
©Csahab

Saturday, November 27, 2010

चंद अल्फाज़ तेरे लिये

कुछ पंक्तियाँ बस के यात्रा के दौरान मन में हिलोरे ले रही थी सोचा लिख लू आज आपके सामने प्रस्तुत है आशा करता हूँ आपको अच्छी लगेगी। इसको लिखे के पीछे कोई निजी अनुभव नहीं पर हाँ देखे हुए जरूर है । 

वो कहते हैं बदनाम हो गया हूँ
उनकी गली में आम हो गया हूँ।

मेरा आना अब उन्हें नागवार गुजरता है
उनके रोशनदान का पर्दा नया लगता है।

छत के फूल भी मुरझाने लगे हैं
सीढ़ियों पर जाले लगने लगे हैं।  

देख कर हमें रंग बदलने लगे हैं
हम भी अब उन्हें भूलने लगे हैं।  

© Csahab